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ज्ञान भारतम मिशन को लेकर सहरसा में बड़ी पहल, पांडुलिपियों के संरक्षण व डिजिटलीकरण पर जोर
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “ज्ञान भारतम मिशन” को सहरसा में गति देने के लिए जिला प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। इसको लेकर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
आज दिनांक 26 मार्च 2026 को दीपेश कुमार, जिलाधिकारी सहरसा की अध्यक्षता में “ज्ञान भारतम मिशन” के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
यह मिशन भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट में एक फ्लैगशिप पहल के रूप में शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य देशभर में मौजूद भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित पांडुलिपियों को सुरक्षित करना और उन्हें डिजिटल माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाना है।
बैठक में बताया गया कि इस मिशन के तहत कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र और कपड़े पर लिखी गई प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग और डिजिटलीकरण का कार्य किया जाएगा। इसके लिए जिले में विशेष अभियान चलाकर ऐसे संस्थानों और व्यक्तियों को चिन्हित किया जाएगा, जिनके पास 75 वर्षों से अधिक पुरानी पांडुलिपियां उपलब्ध हैं।
प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उप विकास आयुक्त को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। साथ ही जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी और सामान्य शाखा के प्रभारी पदाधिकारी को समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा जिले के विद्वानों को भी परामर्शी के रूप में जोड़ा गया है।
जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि जिनके पास 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियां हैं, वे जनहित में इसकी जानकारी जिला जनसंपर्क कार्यालय को कार्यालय अवधि में दें।
बैठक में अपर समाहर्ता निशांत, विशेष कार्य पदाधिकारी राजू कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा कुमारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, “ज्ञान भारतम मिशन” के जरिए सहरसा में प्राचीन धरोहर को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हो चुकी है।
Fitness
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए झारखंड में 30 मार्च से एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू
धनबाद : बेटियों को गंभीर बीमारी सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान 30 मार्च से झारखंड के सभी जिलों में शुरू होने जा रहा है। इस अभियान को लेकर धनबाद जिले में भी स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि 30 मार्च से जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में एचपीवी टीका उपलब्ध कराया जाएगा। इस अभियान के तहत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन का सिंगल डोज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि धनबाद जिले में 15 वर्ष से कम आयु की करीब 31 हजार बच्चियों की पहचान की गई है, जिन्हें इस अभियान के तहत टीकाकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान अगले तीन महीनों तक चलेगा।
वहीं, डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सबसे अधिक होने वाला कैंसर सर्वाइकल कैंसर ही है। वर्तमान में हर एक लाख महिलाओं में लगभग 12 महिलाएं इस बीमारी से ग्रसित हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इस संख्या को घटाकर 12 से 4 तक लाना है, जिसके लिए यह टीकाकरण अभियान बेहद अहम माना जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि एचपीवी वैक्सीन वर्ष 2006 से उपलब्ध है। निजी अस्पतालों में इस वैक्सीन के दो डोज दिए जाते हैं, जिसकी कीमत प्रति डोज लगभग 10 हजार रुपये तक होती है। लेकिन सरकार द्वारा यह टीका पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बेटियों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी बेटियों को इस टीकाकरण अभियान का लाभ दिलाएं और उन्हें सुरक्षित भविष्य प्रदान करने में सहयोग करें।





