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कटिहार में आधार सेंटर पर अवैध वसूली का आरोप, जांच के आदेश
कटिहार जिले के कदवा थाना क्षेत्र के सोनैली इलाके में आधार कार्ड सेंटर के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आया है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आधार कार्ड बनाने और अपडेट करने जैसी सेवाओं के लिए निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं।
लोगों के मुताबिक, जिन सेवाओं के लिए सरकार ने या तो निशुल्क सुविधा दी है या मामूली शुल्क तय किया है, उसके बदले केंद्र संचालक 200 से 300 रुपये तक वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं, जब कोई व्यक्ति इसका विरोध करता है तो उसे डराने-धमकाने की भी कोशिश की जाती है। इस वजह से आम लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय महिलाओं ने भी खुलकर अपनी शिकायत रखी है। पूनम कुमारी ने बताया कि वह अपनी बच्ची का आधार कार्ड बनवाने आई थीं, लेकिन उनसे 300 रुपये ले लिए गए और बाद में सेंटर बंद कर दिया गया। वहीं, गोपीनगर नंदनपुर की रहने वाली जूली देवी ने बताया कि उनके दो बच्चों के आधार कार्ड के लिए 500 रुपये वसूले गए, जिसमें एक का नया कार्ड और दूसरे का अपडेट शामिल था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने डीडीसी अमित कुमार को पूरे मामले की जांच कर जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी ने साफ कहा है कि यदि जांच में अवैध वसूली की पुष्टि होती है तो संबंधित संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने सभी आधार सेंटर संचालकों को निर्देश दिया है कि वे अपने केंद्र पर निर्धारित शुल्क की सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें, ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके। पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी को भी इस मामले की जानकारी दे दी गई है और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।
बंगाल सीमा से सटे इस इलाके में पहले भी ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार लोगों का विरोध खुलकर सामने आया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
Fitness
स्क्रीन टाइम की गिरफ्त में बचपन, फिटनेस पर गहराता संकट
आज के डिजिटल दौर में 9 से 17 साल के बच्चों की जिंदगी तेजी से स्क्रीन के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है। ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का आकर्षण इतना बढ़ गया है कि यह अब आदत से बढ़कर लत का रूप ले चुका है। एक ताजा सर्वे के मुताबिक, भारत में 49 प्रतिशत स्कूली बच्चे रोजाना 3 घंटे या उससे अधिक समय ऑनलाइन गेमिंग में बिताते हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर 8 से 18 वर्ष के लगभग 60% लड़के और 24% लड़कियां ऑनलाइन गेम्स को अत्यधिक पसंद करते हैं।
इस बढ़ते स्क्रीन टाइम का सीधा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (Annual Health Survey) की हालिया रिपोर्ट ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्क्रीन टाइम में बढ़ोतरी और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण करीब 66% स्कूली बच्चों का फिटनेस स्तर कमजोर पाया गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि केवल 34% बच्चे ही एरोबिक फिटनेस के तय मानकों पर खरे उतर पाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एरोबिक फिटनेस का सीधा संबंध दिल और फेफड़ों की क्षमता से होता है। लेकिन रिपोर्ट में यह सामने आया है कि बच्चों की एरोबिक क्षमता तेजी से गिर रही है। इसका मतलब है कि उनके दिल और फेफड़े कमजोर हो रहे हैं और वे लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि करने में सक्षम नहीं हैं।
इस गिरती फिटनेस के पीछे सबसे बड़ा कारण मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली को माना गया है। घंटों मोबाइल या स्क्रीन के सामने बैठना, बाहर खेलने की आदत का कम होना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी बच्चों को बीमारियों की ओर धकेल रही है।
अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में बच्चों में हृदय संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया से संतुलित दूरी बनाकर खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों की ओर प्रेरित किया जाए, ताकि उनका बचपन स्वस्थ और सक्रिय बन सके।





