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भागलपुर
Sports
सहरसा में आपसी विवाद ने लिया हिंसक रूप, गोली लगने से 32 वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल
बिहार के सहरसा जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आपसी विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया और एक युवक को गोली मार दी गई। घटना सदर थाना क्षेत्र के अगवानपुर की है, जहां गुरुवार की संध्या करीब 9 बजे 32 वर्षीय युवक विपिन कुमार को गोली लगने से गंभीर रूप से जख्मी हो गया।
घायल युवक की पहचान अशोक यादव के पुत्र विपिन कुमार के रूप में हुई है, जो अगवानपुर वार्ड नंबर 7 का निवासी बताया जा रहा है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग दहशत में आ गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायल युवक को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह घटना दो भाइयों के बीच चल रहे आपसी विवाद के दौरान हुई। बताया जा रहा है कि विवाद के बीच अचानक गोली चल गई, जिसकी चपेट में आकर तीसरे व्यक्ति विपिन कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि, गोली किसने चलाई और विवाद की असल वजह क्या थी, इसका स्पष्ट खुलासा अभी तक नहीं हो सका है।
घटना के बाद पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद सदर थाना की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
इस मामले में परिजन फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, जिससे घटना को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, सदर एसडीपीओ आलोक कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आपसी विवाद का प्रतीत होता है, लेकिन पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है।
फिलहाल, पुलिस आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है। पूरे मामले की गहन छानबीन जारी है और जल्द ही सच्चाई सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
Fitness
स्क्रीन टाइम की गिरफ्त में बचपन, फिटनेस पर गहराता संकट
आज के डिजिटल दौर में 9 से 17 साल के बच्चों की जिंदगी तेजी से स्क्रीन के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है। ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का आकर्षण इतना बढ़ गया है कि यह अब आदत से बढ़कर लत का रूप ले चुका है। एक ताजा सर्वे के मुताबिक, भारत में 49 प्रतिशत स्कूली बच्चे रोजाना 3 घंटे या उससे अधिक समय ऑनलाइन गेमिंग में बिताते हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर 8 से 18 वर्ष के लगभग 60% लड़के और 24% लड़कियां ऑनलाइन गेम्स को अत्यधिक पसंद करते हैं।
इस बढ़ते स्क्रीन टाइम का सीधा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (Annual Health Survey) की हालिया रिपोर्ट ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्क्रीन टाइम में बढ़ोतरी और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण करीब 66% स्कूली बच्चों का फिटनेस स्तर कमजोर पाया गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि केवल 34% बच्चे ही एरोबिक फिटनेस के तय मानकों पर खरे उतर पाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एरोबिक फिटनेस का सीधा संबंध दिल और फेफड़ों की क्षमता से होता है। लेकिन रिपोर्ट में यह सामने आया है कि बच्चों की एरोबिक क्षमता तेजी से गिर रही है। इसका मतलब है कि उनके दिल और फेफड़े कमजोर हो रहे हैं और वे लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि करने में सक्षम नहीं हैं।
इस गिरती फिटनेस के पीछे सबसे बड़ा कारण मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली को माना गया है। घंटों मोबाइल या स्क्रीन के सामने बैठना, बाहर खेलने की आदत का कम होना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी बच्चों को बीमारियों की ओर धकेल रही है।
अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में बच्चों में हृदय संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया से संतुलित दूरी बनाकर खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों की ओर प्रेरित किया जाए, ताकि उनका बचपन स्वस्थ और सक्रिय बन सके।





