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भागलपुर
Sports
बैलगाड़ियों पर निकली कारोबारी पुत्र की बरात, शहर में छाई देसी और प्रदूषण-मुक्त शादी की चर्चा
शहर की सड़कों पर आज शाम नजारा कुछ अलग ही था। न डीजे की कानफोड़ू आवाज, न चमचमाती लग्जरी गाड़ियों की कतार और न ही रोशनी की चकाचौंध। अगर कुछ था तो बैलों की सधी हुई चाल, लकड़ी की बैलगाड़ियों की मद्धिम चरमराहट और लोकगीतों की कोमल तान। इस अनोखे दृश्य को देखकर राहगीर ठिठक गए और मोबाइल कैमरों में इसे कैद करने लगे।
मौका था शहर के जाने-माने कारोबारी प्रदीप सेठ के पुत्र आलोक की शादी का। गोला रोड स्थित एक होटल से जब शाम ढलते ही बरात निकली तो लगा मानो समय कुछ पल के लिए पीछे लौट गया हो। दूल्हा रथ पर सवार था—सिर पर सेहरा, चेहरे पर सादगी भरी मुस्कान और मन में परंपरा को जीने का संकल्प। उसके पीछे 22 सजी-धजी बैलगाड़ियों का काफिला धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था।
हर बैलगाड़ी को खास अंदाज में सजाया गया था। कहीं सोफा सेट लगे थे तो कहीं गद्दों पर बैठकर बाराती लोकधुनों पर झूम रहे थे। करीब दो किलोमीटर का सफर तय कर यह अनोखी बरात मथुरापुर स्थित गजराज पैलेस पहुंची। तब तक यह सिर्फ एक विवाह जुलूस नहीं, बल्कि पूरे शहर में चर्चा का विषय बन चुकी थी।
इस बरात की सबसे खास बात थी इसका पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त होना। न धुएं का गुबार, न तेज शोर-शराबा—सिर्फ उल्लास, अपनापन और प्रकृति के साथ सामंजस्य। बैलगाड़ी के पहियों की आवाज, फूलों की खुशबू और लोकगीतों की मधुर तान ने ऐसा दृश्य रचा, जैसे गांव की आत्मा स्वयं इस विवाह की साक्षी बन गई हो।
जब यह देसी थीम वाली बरात सड़कों से गुजरी तो लोगों के चेहरे पर हैरानी और मुस्कान एक साथ दिखी। किसी ने कहा, “यह तो असली शादी है”, तो किसी ने इसे परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर संगम बताया।
दूल्हा आलोक ने कहा कि कुछ अलग करने की चाहत थी, लेकिन इसका इतना प्रभाव होगा, यह सोचा नहीं था। यह शादी संदेश दे गई कि सादगी, संस्कृति और पर्यावरण के साथ भी उत्सव उतना ही भव्य हो सकता है।
Fitness
रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह का निधन, टीम इंडिया छोड़कर लौटे थे घर
भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह का ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ हॉस्पिटल में निधन हो गया। वह स्टेज-4 लिवर कैंसर से पीड़ित थे और पिछले कुछ समय से उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई थी। तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। इस दुखद खबर से परिवार और क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
पिता की गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही रिंकू सिंह को टीम इंडिया का साथ छोड़कर तुरंत स्वदेश लौटना पड़ा था। टी-20 विश्वकप के दौरान चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में आयोजित एक अभ्यास सत्र में वह हिस्सा नहीं ले पाए थे, जबकि टीम के अन्य खिलाड़ी अभ्यास में जुटे थे। बाद में स्पष्ट हुआ कि उनके पिता की तबीयत नाजुक है और इसी कारण उन्हें घर लौटना पड़ा।
हाल ही में टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी थी कि रिंकू अपने पिता की अस्वस्थता के कारण घर गए हैं और टीम प्रबंधन को उनके जल्द वापसी की उम्मीद है। हालांकि अब पिता के निधन के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि रिंकू आगामी विश्वकप मैचों में हिस्सा ले पाएंगे या नहीं। इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
रिंकू सिंह अपने पिता के बेहद करीब माने जाते हैं। उनके क्रिकेट करियर में पिता का बड़ा योगदान रहा है। कठिन परिस्थितियों में भी परिवार ने उनका साथ दिया, जिसका जिक्र रिंकू कई बार सार्वजनिक मंचों पर कर चुके हैं। ऐसे समय में पूरा क्रिकेट जगत और उनके प्रशंसक इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े हैं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।





