Politics
Natinol
युद्ध के बीच भारत में फंसी विदेशी म्यूजिशियन, बिहार की संस्कृति ने जीता दिल
युद्ध के बीच भारत में फंसी विदेशी म्यूजिशियन, बिहार की संस्कृति ने जीता दिल
दिग्गज गायिका का निधन, 92 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
दिग्गज गायिका का निधन, 92 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
सुरों की मलिका आशा भोसले का निधन, 92 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
सुरों की मलिका आशा भोसले का निधन, 92 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की हालत गंभीर, कोम में इलाज जारी; ट्रंप का अल्टीमेटम तेज़
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की हालत गंभीर, कोम में इलाज जारी; ट्रंप का अल्टीमेटम तेज़
मिडल ईस्ट तनाव बढ़ा तो महंगाई का खतरा, 40 दिन बाद खाद्य संकट गहरा सकता है: FAO चेतावनी
मिडल ईस्ट तनाव बढ़ा तो महंगाई का खतरा, 40 दिन बाद खाद्य संकट गहरा सकता है: FAO चेतावनी
भागलपुर
Sports
जामताड़ा के शिक्षकों का बिगुल: 18 अप्रैल से रांची में आमरण अनशन, 42 हजार शिक्षक होंगे शामिल
झारखंड के जामताड़ा से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां प्रशिक्षित सहायक अध्यापकों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान कर दिया है। वर्षों से लंबित मांगों को लेकर अब शिक्षक आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।
जामताड़ा के गांधी मैदान में झारखंड राज्य प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघ और आकलन सफल पास संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिलेभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी 18 अप्रैल को राजधानी रांची में प्रस्तावित आमरण अनशन और धरना कार्यक्रम को सफल बनाना था।
बैठक में राष्ट्रीय कमेटी सदस्य सुमन कुमार ने कहा कि सरकार से कई बार मांग करने के बावजूद अब तक न तो वेतनमान मिला है, न ही “समान काम के लिए समान वेतन” लागू किया गया है और न ही शिक्षकों का स्थाईकरण किया गया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अब शिक्षक चुप बैठने वाले नहीं हैं और 18 अप्रैल से 42 हजार शिक्षक मुख्यमंत्री आवास के सामने आमरण अनशन पर बैठेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि आकलन परीक्षा को टेट के समकक्ष मान्यता देने की मांग प्रमुख है। साथ ही सरकार से बिहार की तर्ज पर ठोस निर्णय लेने की अपील की गई है, ताकि शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
वहीं, जिला अध्यक्ष शब्बीर अंसारी ने कहा कि पिछले 24 वर्षों से पारा शिक्षक के रूप में सेवा देने के बावजूद शिक्षकों को केवल उपेक्षा ही मिली है। उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि अब आंदोलन ही आखिरी रास्ता बचा है।
बैठक के अंत में सभी शिक्षकों ने एकजुट होकर रांची में होने वाले आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया। अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि वह इन शिक्षकों की मांगों को लेकर क्या फैसला लेती है।
Fitness
भागलपुर में अंबेडकर जयंती पर रक्तदान शिविर, डॉक्टरों ने खुद रक्तदान कर पेश की मिसाल
भागलपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली, जहां कॉलेज के छात्रों और डॉक्टरों ने मिलकर रक्तदान शिविर का आयोजन किया।
अंबेडकर जयंती के मौके पर आयोजित इस रक्तदान शिविर की अध्यक्षता पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र कुमार ने की। खास बात यह रही कि डॉ. सत्येंद्र कुमार और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर प्रियदर्शी ने स्वयं रक्तदान कर समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
अपने संबोधन में डॉ. सत्येंद्र कुमार ने कहा कि रक्तदान महादान है और यह किसी फैक्ट्री में नहीं बनता, बल्कि जरूरतमंद मरीजों को केवल इंसान ही रक्त देकर जीवनदान दे सकता है। उन्होंने बताया कि यह उनका 19वां रक्तदान है और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। रक्तदान से शरीर में हाइपरलिपीडेमिया कम होता है और बोन मैरो तेजी से नए रक्त का निर्माण करता है।
वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर प्रियदर्शी ने कहा कि बाबा साहेब के जन्मदिन पर रक्तदान करना उनके आदर्शों पर चलने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया से पीड़ित कई बच्चे समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण अपनी जान गंवा देते हैं, जबकि समय पर रक्तदान से उनकी जिंदगी को बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व अधीक्षक एवं प्राचार्य डॉ. (प्रो.) अशोक भगत ने फीता काटकर किया। इसके बाद बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। डॉ. भगत ने अपने संबोधन में बाबा साहेब के संदेश “शिक्षित बनो, संगठित हो और संघर्ष करो” को अपनाने की अपील की।
इस शिविर में कुल 51 छात्रों, चिकित्सकों और शिक्षकों ने रक्तदान किया। रक्त अधिकोष के प्रभारी डॉ. अजय प्रताप ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ. राकेश कुमार, डॉ. पम्मी रे और डॉ. धर्मेंद्र कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





