8 अप्रैल को सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा। सूर्य ग्रहण के दौरान एक ऐसा मौका आता है, जब चंद्रमा पूरी तरह हमारे तारे को ढक लेता है। इसे समग्रता कहते हैं, जो कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक हो सकता है। समग्रता के दौरान सूर्य पूरी तरह गायब हो जाता है। समग्रता के समय ग्रहण को बिना प्रोटेक्शन वाले चश्मे के देखा जा सकता है। इस दौरान सूर्य का कोरोना दिखाई देगा। इसमें इलेक्ट्रिकली चार्ज्ड प्लाज्मा दिखेंगे, जिनकी ऊंचाई इतनी होती है कि कई पृथ्वी समा जाएं।

20 अप्रैल 2023 को ऑस्ट्रेलिया में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा गया था। तब भी सूर्य की ये विशेषताएं दिखी थीं। 8 अप्रैल को मेक्सिको, अमेरिका और कनाडा के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखेगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण 2023 से काफी अलग होने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि सूर्य अपने 11 साल के चक्र की गतिविधि के चरम पर है। इसे सोलर मैक्सिमम के नाम से जाना जाता है। इस दौरान विशाल प्लाज्मा दिखेंगे। आइए जानें सूर्य में होने वाली इन गतिविधियों के बारे में।

सूर्य में होने वाली एक घटना कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के नाम से जाना जाता है। कोलोराडो के बोल्डर में राष्ट्रीय सौर वेधशाला के सौर भौतिक विज्ञानी रायन फ्रेंच ने कहा कि CME सूर्य के कोरोना से चुंबकीय क्षेत्र और प्लाज्मा द्रव्यमान का एक विशाल उत्सर्जन है। यह बेहद तेज गति से निकलता है, लेकिन देखने में स्थिर दिखता है। चंद्रमा की छाया को उत्तरी अमेरिका पार करने में 100 मिनट लगेंगे, इसलिए अगर CME निकली तो इसे देखा जा सकेगा।

सोलर फ्लेयर को सौर ज्वालाओं के नाम से जाना जाता है। सौर ज्वालाएं सूर्य की सतह पर रेडियो तरंगो, दृश्य प्रकाश, एक्स-रे और गामा किरणों के शक्तिशाली विस्फोट हैं। यह प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं। पृथ्वी तक पहुंचने में इन्हें सिर्फ 8 मिनट का समय लगता है। ज्यादातर यह सीएम के साथ निकलती हैं। फ्रेंच ने कहा कि सौर ज्वाला सीएमई से अलग है। यह सूर्य के वायुमंडल में बहुत नीचे होता है। सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा के किनारे के करीब दिखेगा।

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