संसद में पेश किया गया महिला आरक्षण बिल को बिहार की सत्ता रूढ़ पार्टी जेडीयू ने समर्थन किया है। लेकिन, इसके बाबजूद विपक्षी दलों की गठबंधन वाली आईएनडीआईए ने इस समय सदन में लाए जाने को लेकर केंद्र सरकार की जमकर आलोचना भी की है। संसद में आज इस बिल को लेकर जारी बहस में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने काफी जोर-शोर से अपनी बात रखी। ललन सिंह ने इस विधेयक का समर्थन तो जरूर किया, लेकिन केंद्र सरकार को जमकर खरी-खोटी भी सुनाई।

ललन सिंह ने कहा कि – इस विधेयक को लाने का मकसद महिलाओं को संसद में या विधानसभा में आरक्षण देना नहीं है। ये 26 पार्टियों का जो आईएनडीआईए गठबंधन बना है, उसका पैनिक रिएक्शन है। इनकी कोई मंशा नहीं है। ये जुमला है सबसे बड़ा। ये बस 2024 का चुनावी जुमला है। ये महिलाओं को छलने का काम इस बार करना चाहते हैं

ललन सिंह ने कहा कि – 2014 में इन्होंने इस देश के बेरोजगारों को छला- 2 करोड़ लोगों को रोजगार का वादा करके। 2014 में इन्होंने इस देश के गरीबों को छला- कालाधन लाएंगे, सबके खाते में 15 लाख-20 लाख पहुंचाएंगे। इस बार इस देश की महिलाओं को ये छलना चाहते हैं। इनकी मंशा नहीं आरक्षण का। अगर इनकी मंशा होती तो 2021 में इन्होंने जातीय आधारित जनगणना प्रारंभ कराई होती।

इसके आगे जेडीयू सांसद ने कहा कि- आज आवश्यकता है कि जातीय आधारित जनगणना आप कराएं। इस सदन में मांग होती रही, पर आप नहीं कराए। क्योंकि आपको कराना नहीं है। आप गरीबों, अतिपिछड़ों, पिछड़ों के प्रति न्याय करने में आपका विश्वास नहीं है, आपका भरोसा नहीं है। इसलिए आपने जनगणना नहीं कराई। आपने कराई होती तो अब तक जनगणना खत्म हो गई होती।

उधर, ललन सिंह ने कहा कि आज यदि जनगणना करवा दिया गया होता तो यह लागू हो गया होता। इसकी जरूरत ही नहीं पड़ती। लेकिन आपकी मंशा ही नहीं है। आपने 334ए प्रावधान जो किया है, वो अनिश्चितकाल तक चलता रहेगा और 2024 का भारी जुमलेबाजी करके महिलाओं को छलने का काम करेंगे। लेकिन महिलाएं और देश की जनता जान गई है कि आप भारी जुमलेबाज हैं, आपके किसी जुमले पर उसको भरोसा नहीं है।

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