प्रदेश के किसानों को गरमा और खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। 25 अप्रैल से गंडक व कोसी नहर प्रणाली से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा। जल संसाधन विभाग ने इसके लिए तमाम क्षेत्रीय अधिकारियों को तैयारी करने को कहा है। ये नहरें 25 अक्टूबर तक खुली रहेंगी। सोन नहर प्रणाली से खरीफ के लिए एक जून से पानी मिलेगा।

दरअसल, विभाग ने पिछले दिनों नहर संचालन प्रणाली में बदलाव किया है। 20 वर्षों के बाद नहरों से पानी देने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने इस वर्ष से नयी व्यवस्था को खरीफ, रबी और गरमा तीनों सिंचाई के लिए लागू करने का निर्णय लिया है। नयी व्यवस्था सोन, कोसी व गंडक नहर प्रणालियों के साथ-साथ जलाशयों से सिंचाई में लागू होगी। राज्य सरकार द्वारा जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत उत्पादकता बढ़ाने के मकसद से कृषि विभाग के अनुरोध पर नहर संचालन अवधि में संशोधन किया गया है। हालांकि इसमें गंडक व कोसी नहर प्रणाली के तहत गरमा व खरीफ फसलों के लिए सिंचाई का पानी देने के समय सारणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

तीन प्रमुख नहर प्रणाली

कोसी नहर प्रणाली

कोसी नदी के वीरपुर बराज से पूर्वी व पश्चिमी नहर प्रणाली निकलीती है।

यहां से सुपौल, सहरसा, खगड़िया, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, मधेपुरा व दरभंगा जिले को सिंचाई के लिए पानी मिलता है।

गंडक नहर प्रणाली

गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बराज से पूर्वी व पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली को जलापूर्ति होती है।

यहां से पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, गोपालगंज, सीवान व सारण जिले को सिंचाई के लिए पानी मिलता है।

सोन नहर प्रणाली

सोन नदी पर इन्द्रपुरी बराज से पूर्वी व पश्चिमी सोन नहर प्रणाली को जलापूर्ति की जाती है। यहां से औरंगाबाद, गया, अरवल, पटना, रोहतास, कैमूर, बक्सर व भोजपुर के सिंचाई के लिए पानी मिलता है।

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